चाहे जहां जिस हाल में हो ज़िंदगी तुम्हारी
सदा मुस्कुराते रहना
बड़ी प्यारी है ये हँसी तुम्हारी
सदा मुस्कुराते रहना
ज़िंदगी का क्या है मुश्किलें आती ही रहती हैं
पहाड़ों से निकल कर सागर तक नदी
कहां बिना अड़चन के बहती है
नदी की कलकल सी है ये शोख़ी तुम्हारी
सदा मुस्कुराते रहना
बड़ी प्यारी है...।
ख़ता औरों ने की है तो सज़ा
ख़ुद को क्यूँ यूँ देना
धता औरों ने दी है तो बदला
ख़ुद से क्युँ लेना
यही आदत नहीं अच्छी तुम्हारी
सदा मुस्कुराते रहना
बड़ी प्यारी है...।
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