रुक सको तो रुक जाना कुछ पल
फिर बेशक़ बढ़ जाना आगे
बस गुज़र जाने दो ये चंद घड़ियां
फिर बेशक़ मुझको जग त्यागे
ना मेरे पास मेरी ख़ुशियां
ना मेरे साथ मेरी दुनियां
ठहर जाओ कुछ देर को बस
शायद मिल जाए राह मुझे आगे
ना कोई शिक़ायत फिर तुमसे
ना कोई गिला फिर इस जग से
चले जाना तुम अपने रस्ते
सुलझा लूँ बस कुछ उलझे धागे
रुक सको तो...।
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