जी करता है कि बढ़ा कर हाथ
आंसू तुम्हारे पोंछ दूं
मन में आता है गले से लगा
हर ग़म तुम्हारे सोख लूं
पर फिर ख़याल आता है
है हमारे दरमियान जो फासला
छू सकूं तुझको भला
मेरे लिए मुमकिन कहां
हां दे पर सकता हूं तुम्हें
मैं हर क़दम पे हौसला
साथ दे सकता हूं तेरा
ले जो तू कोई फ़ैसला
और कभी जो तेरा रास्तों में
हो मुश्किलों से सामना
बस एक ज़रा आवाज़ देना
और पीछे मुड़ कर देखना।
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