सर जी फिर से आना है,इस
गुलशन को महकाना है.
है फूल कई यहाँ डाल कई,पर
इनको फिर से लरकाना है.
सर जी फिर से आना है,ओ
सर जी फिर से आना है.
है शाम वही यहाँ सुब्ह वही,
हम चिड़ियों को उड़ जाना है.
किस्मत की नई चौखट लेके,
किस द्वार हमें अब जाना है.
अपनी तो मंजिल न ठौर कहीं,
कहाँ अपना यहाँ ठिकाना है.
सर जी आपको आना है,ओ
सर जी फिर से आना है.
-आलोक शुक्ल
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