पराईबेट मा टीचिंग कई कै शुक्ला जी बौराय गए,
याक महीन मा पईसा पाईन पाउतै ऊ पगलाए गए.
सपना देखिन वै दुल्हिन के अउ लैकी से भेटाय गए,
किहिन तनी कै जल्दबाजी फिर मुहब्बत मा चपाए गए.
जात पात का भूली के वो अपना होश गवाए गए,
छोड़ि भाग सब परै नौकरी देखी दरोगा लुकाय गए.
-आलोक शुक्ल
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