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सुबह की चाय.......

                
                                                         
                            आह ! ये सुबह की चाय...
                                                                 
                            
तुम अगर मनुज होती
तो मेरी प्रिय मित्र होती।
शायद तुम्हारे बिना
जिंदगी अधूरी होती।
क्योंकि तुम वो अमृत हो
जिसे पान कर मेरी
दिन की शुरुआत होती है।
अरे तुमने तो मुझे बीमारी में गम में और ना चिंतन में कहीं भी अकेला नहीं छोड़ा ।
कभी अदरक, तुलसी ,अजवाइन
तो कभी बिना दूध और शक्कर के साथ।
तुम ना मेरी खास इसलिए भी हो
क्योंकि तुम्हें हर कोई चाहता है।
कभी कॉफी तो कभी ग्रीन टी के रूप में।
अरे तुम कहीं भी टिक जाती हो
चाहे वो बड़ा रेस्टोरेंट हो या गली का नुक्कड़ ।
आह ये सुबह की चाय

---वंदना ठाकुर
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3 वर्ष पहले

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