जब मन के भीतर कोने में दर्द कोई सिसकी लेता है लव कहना चाहते हैं कुछ पर होठ ज्यों कोई सी देता है
तब आंखों से आंसुओं का सैलाब निकलता है निकल कर रुखसार पर ठहरता है
तब मैं सीने पर रखे बोझ को को हल्का कर देती हूं और
दुनिया कहती है ,पगली बस रोती ही रहती है
- अर्पिता
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