आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

आरक्षण

Reservation
                
                                                         
                            जल रहा है देश सारा आज,फिर एक आग से
                                                                 
                            
आरक्षण ने छीन लिया,भाईचारा देश से।

एक तरफ जाट खड़ा हो जाता है,लाठी ले कर हाथा में
एक ओर गुर्जर व पटेल बैठा ,रेल की पटरियों पे।

कभी जलता उतरप्रदेश ,कभी गुजरात,कभी जलता हरियाणा है
बस इतना बताओ तुम,ये देश किसका अपना है?

भीम सेना,करणी सेना ,पटेल सेना किसने ये बनाई है।
मानव मन के अंदर ये,कालिख किसने जगाई है।

संविधान बना था कल,आज अगर सुधार हुआ
बोलो किसपे अब ,किसने अत्याचार किया।

तुम मुझे ,मैं तुमको मारूं,इसी से सब सर्वनाश हुआ
शौर्य भी तो बाहरी कहते ,इसी लिए बर्बाद हुआ।

आज भी ये दंगाई मिलकर वो हाल ,कर डालेंगे सब
फिर कुछ बाहर वाले आकर,तम्बू डालेंगे अब।

इतिहास जिस कारण ,भारत का बर्बाद हुआ।
मत करो अब कुछ ऐसा,सम्भल जाओ मानव तुम
वरना भविष्य भी मानो ,इसी सत्ता की लोलुपता का शिकार हुआ।

हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
 
8 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर