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अटूट प्रेम का धागा

                
                                                         
                            कच्चे धागों में सिमटा है, सदियों का विश्वास l
                                                                 
                            
दूर क्षितिज पर रहकर भी, जो लाता है पास।l

वो चंदन का छोटा टीका, वो अक्षत का मान l
बहन की छोटी सी दुनिया, भाई का अभिमान ।।

बचपन की वो खट्टी यादें, वो इमली का स्वाद ।
रूठना-मनाना और वो, छुपकर करना याद।।

आज अचानक याद आ गया, वो आँगन का खेल ।
वक्त बदल गया पर बदला, नहीं दिलों का मेल।।

रेशम का हर एक धागा, बहनों के प्रेम का बंधन है ।
लंबी उम्र का प्रतीक , हरदम महकता चन्दन है।।

चाहे जितने हों फासले , चाहे दूरी हो हजार ।
कभी नहीं कम होता है, इस धागे का प्यार।।

यह सिर्फ इक त्योहार नहीं, ये मन की पावन रीत है ।
सुरक्षा का वादा है इसमें, और पवित्र सी प्रीत है।।

जब तक रहेगी सृष्टि, चमकेगा ये स्नेह अपार ।
अटूट प्रेम का धागा है ये, रक्षाबंधन का त्योहार।।
-डीपी सिंह
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2 घंटे पहले

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