आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

टेम्पो वाला दोगुना किराया मांगे

                
                                                         
                            मैं आया गया शहर में
                                                                 
                            
मैं आया बुद्ध के शहर में
सड़क मिले टूटे फूटे
लोग मिले रूठे रूठे
टेम्पो वाला दोगुना किराया मांगे
टेम्पो वाला का भाग्य जागे
लोग करें झगड़ा
लोग करें रगड़ा
बच्चे चंचल
बड़े चंचल
शहर रास न आया
मैं गया क्यों आया
सोच कर पछताया
कवि मिले अच्छे अच्छे
साहित्यकार मिले अच्छे अच्छे
पत्रकार मिले अच्छे अच्छे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
एक घंटा पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर