मैं आया गया शहर में
मैं आया बुद्ध के शहर में
सड़क मिले टूटे फूटे
लोग मिले रूठे रूठे
टेम्पो वाला दोगुना किराया मांगे
टेम्पो वाला का भाग्य जागे
लोग करें झगड़ा
लोग करें रगड़ा
बच्चे चंचल
बड़े चंचल
शहर रास न आया
मैं गया क्यों आया
सोच कर पछताया
कवि मिले अच्छे अच्छे
साहित्यकार मिले अच्छे अच्छे
पत्रकार मिले अच्छे अच्छे।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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