भारत से मुझे प्यार है
मुझे नदियों से प्यार है
मुझे पर्वतों से प्यार है
मुझे मैदानों से प्यार है
मुझे भगतसिंह ,सुखदेव से प्यार है
मुझे आजाद,कलाम,अटल से प्यार है
मुझे मेरे माटी से प्यार है
मुझे मेरे गांव से प्यार है
मुझे मेरे पेड़ों से प्यार है
मुझे मेरे आसमान से प्यार है
मुझे मेरे हिंदुस्तान से प्यार है
मुझे मेरे खेत खलिहान से प्यार है
मुझे मेरे बागी बलिया से प्यार है
मुझे मेरे बागी बैरिया से प्यार है
मुझे मेरे बाग बगीचे से प्यार है
मन मेरा
तन मेरा
स्वदेश पर मर मिटने को तैयार है
स्वदेश पर मन मेरा जुटने को तैयार है।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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