जाति पांति के चक्कर में
धर्म पंथ के चक्कर में
समाज पीछे जाए
पर समझ न आए
तनी को शरम न आए
हाए हाए हाए हाए
समाज पीछे जाए
केहू का न बुझाए
जाति पांति को भगाएं
जागरूकता हम लाएं
तो विकसित हम हो जाएं
कैसे हम समझाएं?
कैसे विकसित वतन बनाएं
चलो जाति पांति हम हटाएं
जरा शिक्षित हो हम जाएं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
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