आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

हैं हम हिंदू मुसलमान,एक समान

                
                                                         
                            न हम हिंदू हैं,न हम मुसलमान हैं
                                                                 
                            
हम तो सभी सदा से सर्वत्र समान हैं
हम तो सभी सदा से सीधे साधे इंसान हैं
रंग एक हैं हमारे
ढंग एक हैं हमारे
लहू का रंग एक है
आत्मा का रंग एक है
हृदय हमारे एक हैं
चांद एक है
सूरज एक है
अंबर एक है
अवनी एक है
मुंह एक है
नाक एक है
जीभ एक है
शीष एक है
ललाट एक है
स्वर एक है
भले धर्म अनेक हैं
पर हम सब एक हैं
हिंदुस्तान एक है
भगवान एक हैं
तो मत करो हिंदू मुसलमान
मत कहो हिंदू मुसलमान
हैं सभी सदा से एक समान।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
2 घंटे पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर