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दुष्ट चीन

                
                                                         
                            दुष्ट चीन
                                                                 
                            
हड़प लिया अपना अक्साई चिन
और हम ताकते रह गए
दोस्त समझ झांकते रह गए
इधर
उधर
किधर?
किधर?
अब लड़ना होगा
अब अड़ना होगा
अब टिकना होगा
अब सीखना होगा
छल कपट से दूर हैं हम
पर वीरता से भरपूर हैं हम
जो गलती हुई
वो हुई
अब न झुकेंगे
अब न रूकेंगे
अब लिखेंगे नई कहानी
बन कर बलिदानी
बन कर सेनानी
बागी बलिया वाले हैं हम
बागी बैरिया वाले हैं हम
जानेगी दुनिया कौन हैं हम?
तो क्यों मौन हैं हम?
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 घंटे पहले

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