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अखंड भारत

                
                                                         
                            मेरा भारत अखंड भारत
                                                                 
                            
यहां हुए कई महाभारत
जिसके कारण खंडित हुआ
हमारे ही कारण दंडित हुआ
किए हम भूल पर भूल
चढ़ाते रहे चीन पर फूल
पद की दावेदारी में खंडित हुआ
अशोक का भारत
चंद्रगुप्त मौर्य का भारत
क्यों गया बिखर?
छूते थे हम शिखर
हमारा नालंदा विश्वविद्यालय
हमारा विक्रम शिला विश्व विद्यालय
हमारा तक्षशिला विश्वविद्यालय
विश्व का सितारा था
सबके आंखों का तारा था
भारत हमारा बड़ा प्यारा था
चलो फिर वही भारत बनाएं
चलो फिर खुशियां मनाएं
पड़ोसियों को साथ लाएं
पुनः अखंड भारत बनाएं।
- सत्येन्द्र कुमार सिंह 'सहज'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
19 घंटे पहले

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