हर किसी की कविता, हर किसी की कहानी है
किसी को मौन रहना तो किसी को सुनानी है
सुना रहे हो जिसे तुम दर्द अपना
सोचा कभी उसने भी कितना कुछ सहा होगा
कभी वह कह ना पाया कभी उसके पास कहने के लिए कोई रहा ना होगा ।।
दूर से देखा तुमने सबके उपवन को खिला हुआ
कोसा तुमने खुद को अपनी किस्मत पर गिला हुआ
पर फूलों वाले उपवन में भी शूलों की रवानी है
हर किसी की कविता हर किसी की कहानी है।।
शिखर पर चढ़ते देख किसी को तु अचंभित क्यों हो रहा?
शिखर यूं ही उसके पैरों में ना आया होगा
न जाने कितनी ठोकरें लगी, कैसे उसने लहू से सने पैरों को समझाया होगा
जिस डगर पर वह चला उसके लिए वह कहां पहचानी है
हर किसी की कविता हर किसी की एक कहानी है
सुनने का तू जज्बा रख सुनाने का तू आदि है
हर किसी की कविता हर किसी की एक कहानी है।।
-अंजना चौधरी
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