आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

एक कहानी पूरी करनी है

                
                                                         
                            मैंने सुखों का रास्ता रोक रखा है,
                                                                 
                            
सुख के साथ दुःख भी आते हैं।
पहले सारे दुःखों से निपट लूँ,
और एक कहानी ख़त्म कर लूँ...

कुछ अधूरे ख़्वाबों को चुपचाप विदा कर दूँ,
कुछ बिखरे हुए पन्नों को हवा के हवाले कर दूँ...

जो छूट गया, उसे छोड़ दूँ,
जो ठहरा है, उसे बह जाने दूँ।
अपने हिस्से की ख़ामोशी से
थोड़ा और संवाद कर लूँ...

फिर सुखों का रास्ता खोल दूँगी,
उन्हें आने की वजह भी दूँगी...

कई बार कहानियाँ काग़ज़ पर पूरी होती हैं,
और कुछ लिखते-लिखते मन में।

बस, एक बार इस मन के
मौसम से पूरी तरह गुज़र लूँ।

तस्वीरों को रास्ता देकर,
फिर एक कहानी से रुख़सत होती हूँ...!!
—अनीता 'निधि'
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
3 hours ago

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर