मैंने सुखों का रास्ता रोक रखा है,
सुख के साथ दुःख भी आते हैं।
पहले सारे दुःखों से निपट लूँ,
और एक कहानी ख़त्म कर लूँ...
कुछ अधूरे ख़्वाबों को चुपचाप विदा कर दूँ,
कुछ बिखरे हुए पन्नों को हवा के हवाले कर दूँ...
जो छूट गया, उसे छोड़ दूँ,
जो ठहरा है, उसे बह जाने दूँ।
अपने हिस्से की ख़ामोशी से
थोड़ा और संवाद कर लूँ...
फिर सुखों का रास्ता खोल दूँगी,
उन्हें आने की वजह भी दूँगी...
कई बार कहानियाँ काग़ज़ पर पूरी होती हैं,
और कुछ लिखते-लिखते मन में।
बस, एक बार इस मन के
मौसम से पूरी तरह गुज़र लूँ।
तस्वीरों को रास्ता देकर,
फिर एक कहानी से रुख़सत होती हूँ...!!
—अनीता 'निधि'
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