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मुझे वो मक़ाम चाहिए ।

                
                                                         
                            बेफिक्र रहे मुझे किसी की सांझेदारी नहीं चाहिए
                                                                 
                            
किसी के हिस्से की ना जमीं ना किसी के हिस्से का
आसमा चाहिए
गर ख़ुदा दे मुझे तो मुझे मेरा ही फ़लक
मेरा ही आसमा चाहिए
मेरी शख्शियत भिन्न है सहाब
ना झूठे ख्वाबों की ख्वाहिश मुझे
ना मुझे , पूरे ना होने वाले अरमान चाहिए
मेरी शिद्दत बस इतनी सी है , जो मेरे हक़ का
है मुझे वो मक़ाम चाहिए ।।
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4 महीने पहले

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