आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

क़िस्मत में ये कहानी

                
                                                         
                            बादल बरसा है या बरसा है आंखों का पानी
                                                                 
                            
ख़ुदा कैसे लिख देता है किसी की
किस्मत में ये कहानी
तन्हाई से भाग कर जाते कहां
आके टकरा गई हमसे हमारी
परछाई
बादल बरसा है या बरसा है आंखों का पानी
अश्कों से साफ़ करते रहे हम अपने दमन को
मुंह में आके कोई बता गया जाने क्या - क्या
खता हमारी
बादल बरसा है या बरसा है आंखों का पानी
ख़ुदा खैर करें फिर भी उनका हर बेबस की
होती है यही कहानी
बादल बरसा है या बरसा है आंखों का पानी ।।
- हम उम्मीद करते हैं कि यह पाठक की स्वरचित रचना है। अपनी रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें।
4 महीने पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर