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क्या आज क्या कल

                
                                                         
                            कहने को जो आज है,
                                                                 
                            
वो बन जायेगा कल,

एक अनदेखा भविष्य है,
एक गुज़रा हुआ है कल,

आज जैसा कुछ रहता नहीं,
कि बस रह जाता है कल,

एक लौटा नहीं एक आया नहीं,
पर हर ज़िक्र में शामिल है कल,

रहता कुछ भी हमेशा नहीं,
फिर आज हो या कल।
-अम्बर श्रीवास्तव।
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एक घंटा पहले

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