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ग़ज़ल

                
                                                         
                            मां-बाप खुश हैं तो सब कुछ अच्छा ही होगा,
                                                                 
                            
यहां मंदिर मस्जिद तो बहुत हैं कोई भगवान थोड़ी है।

तेरे शबाब के शरारे ने सारे शहर में आग लगा रखी थी ,
अगर मेरा भी विला जला तो कोई सिंगल मकान थोड़ी है।

एक वक्त था जब तेरी चाहत का तकाजा था मुझे,
अब तेरा इंतजार करूं तो कैसे,#मोहब्बत है,कोई दुकान थोड़ी है।

आज हवा के जरिए उसने मुझे पैगाम भेजा है ,
ये झोंके हैं मोहब्बत के कोई तूफान थोड़ी है।

बचपन- जवानी- बुढ़ापा #आसासा सिलसिले ,
ये जिंदगी के घर हैं कोई मकान थोड़ी है ।

चलो मान लेते हैं तुम हरदम इबादत करते हो खुदा की ,
अगर कर्म अच्छे नहीं तो पत्थर वो मेहरबान थोड़ी है ।

देश की अर्थव्यवस्था लाचार है और तुम खुश हो ,
ये मंदी है जनाब कोई नोबेल सम्मान थोड़ी है।

हमारे देश का कतरा-कतरा इंकलाब लिखता है ,
ये हिंदुस्तान है मियां कोई पाकिस्तान थोड़ी है।

चालान कटेंगे तो आएंगी सुनहरी गलियां भी गिरफ्त में,
सिग्नल तोड़ना सिर्फ बवालियों का काम थोड़ी है।

बेटियां तो घर की आन बान शान होती हैं,
यह पापा की परियां हैं कोई झलकता जाम थोड़ी है।

आलोक तू अपने दोस्तों की पूजा क्यों नहीं करता,
यह फरिश्ते हैं कोई मतलबी इंसान थोड़ी हैं।

 "Alok yadav"


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6 वर्ष पहले

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