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सोचो ज़रा ये क्यों बनाया, बंदूकों को अपना गहना

                
                                                         
                            न समझो तुम कैसा देश है,
                                                                 
                            
बिहार की गाथा अजीब है।
अपराधी का वह मज़हब है,
सत्ता में बैठे राम का भक्त।

भ्रष्ट पर जो आवाज़ उठाया,
मृत शरीर को जगाने वाला,
भरत, तुम आतंकी कहलाया,
देश के प्रति सोच रखने वाला।

गरीब, लाचार का आँसू पोंछना,
हमारे राजा को वो नहीं भाया।
टूट न जाए चारपाई का पैर कहीं,
वीर योद्धा को पागल कह दिया।

सोचा क्यों नहीं एक बार राजा,
आँखों में क्यों डर नहीं उसके राजा?
माँ का आँचल अब तो मैला हुआ,
बहन का काजल तू धो गया राजा।

आँखों में उसकी अंगार था,
ख़्वाबों में उसका एक सपना,
सोचो ज़रा ये क्यों बनाया,
बंदूकों को अपना गहना।
 
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2 महीने पहले

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