मृत्यु निकट थी
परिस्थितियां विकट थी
तब भी हृदय में ध्येय की धधकती धवल ज्वाला 'इसी देह में' इन्ही आंखों से
आपने स्वप्न सत्य कर डाला अभी स्वप्न शेष है कई
यह अंतिम विदाई नहीं अंतिम विदाई नहीं।
तुम दुर्गा थी तुम शक्ति थी
तुम थी ममता का संसार
तुम दूर वतन से बैठे लोगों में
थे सुरक्षा के आसार
न्याय त्याग कर्तव्य ध्येय से पूर्ण आप हम सब से है दूर हुई
इस दुखद खबर को सुनकर
हर भारतवासी की आँखे अश्रुपूर्ण हुई
हे सौम्यमूर्ति..... है प्रणाम तुमको
स्वीकार अंतिम विदाई करो।
स्वीकार अंतिम विदाई करो।
#RIP Sushma swaraj maa'm
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