मौजों में रहना अपराध है, या ये दूरियाँ गुनाह हैं?
परिंदों का क्या... वो क्या जानें,
वह हमसे क्यों रूठेगा?
और ये परिंदे... भला क्या समझें!
उम्र की दहलीज़ पार कराकर,
फिर उन्होंने खुद गाथा गाई,
और गुनगुना कर चले गए...
पर हम... हम क्या समझे?
हम क्या समझे... हम क्या समझे!
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