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पत्रकारिता दिवस - ऐसे कवि जिन्होंने पत्रकारिता धर्म भी ख़ूब निभाया

Hindi Patrakarita diwas - hindi journalist poets
                
                                                         
                            
आज हिंदी पत्रकारिता दिवस है। आज ही के दिन पहला हिंदी अख़बार उदन्त मार्तण्ड प्रकाशित किया गया था। जिसे पं. युगल किशोर शुक्ल ने प्रकाशित करवाया था। इसलिए हर 30 मई को यह दिवस मनाया जाता है। इसी क्रम में आइए जानते हैं कि ऐसे कौन से कवि थे जो पत्रकार भी थे।
 
माखनलाल चतुर्वेदी

हिम-तरंगिणी लिखने वाले माखनलाल चतुर्वेदी एक कवि होने के साथ- साथ एक पत्रकार भी थे। उन्हें साहित्य अकादमी से सम्मानित किया जा चुका है। उनकी यह रचना लोगों को मुंह ज़ुबानी याद है।

चाह नहीं मैं सुरबाला के
 गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
 बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव
पर हे हरि, डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर
चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
जिस पथ जावें वीर अनेक

रघुवीर सहाय

रघुवीर सहाय

कवि रघुवीर सहाय साप्ताहिक पत्रिका दिनमान के संपादक थे। उन्हें उनके काव्य संग्रह लोग भूल गए हैं के लिए साहित्य अकादमी से सम्मानित किया गया था। उनकी लिखी एक कविता

अरे अब ऐसी कविता लिखो
कि जिसमें छंद घूमकर आय
घुमड़ता जाय देह में दर्द
कहीं पर एक बार ठहराय

कि जिसमें एक प्रतिज्ञा करूं
वही दो बार शब्द बन जाय
बताऊँ बार-बार वह अर्थ
न भाषा अपने को दोहराय

अरे अब ऐसी कविता लिखो
कि कोई मूड़ नहीं मटकाय
न कोई पुलक-पुलक रह जाय
न कोई बेमतलब अकुलाय

छंद से जोड़ो अपना आप
कि कवि की व्यथा हृदय सह जाय
थामकर हँसना-रोना आज
उदासी होनी की कह जाय ।
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रघुवीर सहाय

7 वर्ष पहले

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