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अटल बिहारी वाजपेयी की कविता: स्वतंत्रता दिवस की पुकार 

अटल बिहारी वाजपेयी की कविता: स्वतंत्रता दिवस की पुकार
                
                                                         
                            पन्द्रह अगस्त का दिन कहता- आज़ादी अभी अधूरी है
                                                                 
                            
सपने सच होने बाक़ी हैं, राखी की शपथ न पूरी है॥ 

जिनकी लाशों पर पग धर कर आजादी भारत में आई
वे अब तक हैं खानाबदोश ग़म की काली बदली छाई॥ 

कलकत्ते के फुटपाथों पर जो आंधी-पानी सहते हैं
उनसे पूछो, पन्द्रह अगस्त के बारे में क्या कहते हैं॥  आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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