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जन्म मिथ्या है, क्योंकि उस पर, मृत्यु का प्रश्नचिन्ह है: नीरज 

Gopaldas Neeraj
                
                                                         
                            कविता के संदर्भ में 'नीरज' ने 'दर्द दिया है' की भूमिका में कहा है- ''जब लिखने के लिए लिखा जाता है तब जो कुछ लिखा जाता है उसका नाम है गद्य। पर जब लिखे बिना न रहा जाए और जो पद लिख-लिख जाए उसका नाम है कविता।  मेरे जीवन में कविता लिखी नहीं गई, खुद 'लिख-लिख' गई है, ऐसे ही जैसे पहाड़ों पर निर्झर और फूलों पर ओस की कहानी।  जिस प्रकार 'जल-जलकर बुझ जाना' दीपक की विवशता है। उसी प्रकार 'गा-गाकर चुप हो जाना' मेरे जीवन की मजबूरी है। गा-गाकर चुप हो जाने की इस मजबूरी के कारण ही 'नीरज' ने जो भी लिखा है गाकर लिखा है, गाते हुए लिखा  है।'' 
                                                                 
                            

' नीरज' मानव प्रेम के गीत गाए हैं, प्रेयसी को संबोधित गीत गाए हैं, संपूर्ण मानवता के दुख-दर्द को रेखांकित करने वाले विद्रोही गीत भी गाए हैं। प्रस्तुत है नीरज की कुछ चुनिंदा रचनाएं....  

जन्म मिथ्या है 
क्योंकि उस पर 
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प्रेम मिथ्या है 

एक वर्ष पहले

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