कविता के संदर्भ में 'नीरज' ने 'दर्द दिया है' की भूमिका में कहा है- ''जब लिखने के लिए लिखा जाता है तब जो कुछ लिखा जाता है उसका नाम है गद्य। पर जब लिखे बिना न रहा जाए और जो पद लिख-लिख जाए उसका नाम है कविता। मेरे जीवन में कविता लिखी नहीं गई, खुद 'लिख-लिख' गई है, ऐसे ही जैसे पहाड़ों पर निर्झर और फूलों पर ओस की कहानी। जिस प्रकार 'जल-जलकर बुझ जाना' दीपक की विवशता है। उसी प्रकार 'गा-गाकर चुप हो जाना' मेरे जीवन की मजबूरी है। गा-गाकर चुप हो जाने की इस मजबूरी के कारण ही 'नीरज' ने जो भी लिखा है गाकर लिखा है, गाते हुए लिखा है।''
' नीरज' मानव प्रेम के गीत गाए हैं, प्रेयसी को संबोधित गीत गाए हैं, संपूर्ण मानवता के दुख-दर्द को रेखांकित करने वाले विद्रोही गीत भी गाए हैं। प्रस्तुत है नीरज की कुछ चुनिंदा रचनाएं....
जन्म मिथ्या है
क्योंकि उस पर
मृत्यु का प्रश्नचिन्ह है,
प्रेम मिथ्या है
क्योंकि वह
घृणा की पीड़ा से छिन्न है
सृजन मिथ्या है
क्योंकि वह
ध्वंस के उत्सव से अभिन्न है
तो क्या यहां मिथ्या ही सत्य है
जीवन कटना था कट गया
अच्छा कटा
बुरा कटा
यह तुम जानो
मैं तो यह समझता हूं
कपड़ा पुराना था फटना था फट गया
जीवन कटना था कट गया
रीता है क्या कुछ
बीता है क्या कुछ
यह हिसाब तुम करो
मैं तो यह कहता हूं
परदा भरम का जो हटना था हट गया
जीवन कटना था कट गया
क्या होगा चुकने के बाद
बूंद-बूंद रिसने के बाद
यह चिंता तुम करो
मैं तो यह कहता हूं
कर्जा जो मिट्टी का पटना था पट गया
जीवन कटना था कट गया
बंधा हूं कि खुला हूं
मैला हूं कि धुला हूं
यह विचार तुम करो
मैं तो यह सुनता हूं
घट-घट का अंतर जो घटना था घट गया
जीवन कटना था कट गया
साभार : हमारे लोकप्रिय गीतकार- गोपालदास 'नीरज', संपादक- शेरजंग गर्ग (वाणी प्रकाशन)
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प्रेम मिथ्या है
एक वर्ष पहले
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