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आपातकाल को पूरे हुए 43 बरस, इन कविताओं से समझिए क्या होता है विद्रोह...

आपातकाल
                
                                                         
                            भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में 25 जून 1975 का दिन काला दिवस है। इस दिन देश में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल लागू किया था। इस दौरान नागरिकों के अधिकार और स्वतंत्रता का घोर हनन किया गया। 21 मार्च 1977 तक यानी 21 महीने की अवधि तक यह जारी रहा। वैचारिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात करने वाले इस  आपातकाल के दौर को हम विभिन्न कविताओं और शेर-शायरी के जरिए यहां याद कर रहे हैं।
                                                                
                
                
                 
                                    
                     
                                             
                                                

आपातकाल के एक वर्ष पूरे होने पर अटल जी ने यह कविता जेल में लिखी थी...

आपातकाल के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी जेल में बंद थे। आपातकाल के एक वर्ष पूरे होने पर उन्होंने एक कविता लिखी थी।

झुलसाता जेठ मास
शरद चांदनी उदास
सिसकी भरते सावन का
अंतर्घट रीत गया
एक बरस बीत गया

सींखचों में सिमटा जग
किंतु विकल प्राण विहग
धरती से अम्बर तक
गूंज मुक्ति गीत गया
एक बरस बीत गया

पथ निहारते नयन
गिनते दिन पल छिन
लौट कभी आएगा
मन का जो मीत गया
एक बरस बीत गया
 
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आपातकाल के एक वर्ष पूरे होने पर अटल जी ने यह कविता जेल में लिखी थी...

8 वर्ष पहले

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