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'धुआं' पर कहे गए शेर

dhuan shayari collection
                
                                                         
                            

गुलशन की फ़ज़ा धुआं धुआं है
कहते हैं बहार का समां है
- हबीब जालिब


हद्द-ए-निगाह शाम का मंज़र धुआं धुआं
छाने लगा है ज़ेहन के अंदर धुआं धुआं
- इक़बाल अंजुम

हर एक शाम का मंज़र धुआं उगलने लगा
वो देखो दूर कहीं आसमां पिघलने लगा
- अमीर इमाम


चराग़ देने लगेगा धुआं न छू लेना
तू मेरा जिस्म कहीं मेरी जां न छू लेना
- इरफ़ान सिद्दीक़ी

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5 वर्ष पहले

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