गुलशन की फ़ज़ा धुआं धुआं है
कहते हैं बहार का समां है
- हबीब जालिब
हद्द-ए-निगाह शाम का मंज़र धुआं धुआं
छाने लगा है ज़ेहन के अंदर धुआं धुआं
- इक़बाल अंजुम
हर एक शाम का मंज़र धुआं उगलने लगा
वो देखो दूर कहीं आसमां पिघलने लगा
- अमीर इमाम
चराग़ देने लगेगा धुआं न छू लेना
तू मेरा जिस्म कहीं मेरी जां न छू लेना
- इरफ़ान सिद्दीक़ी
आगे पढ़ें
कमेंट
कमेंट X