गुलशन की फ़ज़ा धुआं धुआं है
कहते हैं बहार का समां है
- हबीब जालिब
हद्द-ए-निगाह शाम का मंज़र धुआं धुआं
छाने लगा है ज़ेहन के अंदर धुआं धुआं
- इक़बाल अंजुम
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