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23 मार्च की स्मृति: भगत सिंह की इन शायरियों को पढ़कर आदमी का इश्क इंकलाब हो जाएगा... 

23 मार्च की स्मृति: भगत सिंह की इन शायरियों को पढ़कर आदमी का इश्क इंकलाब हो जाएगा...
                
                                                         
                            शहीदे आजम भगत सिंह जैसा दीवाना इस देश को दोबारा नहीं मिला। 23 मार्च को ब्रिटिश साम्राज्यवाद ने फांसी के तख्ते पर लटकाया था। उनकी देशभक्ति की शौर्य गाथा आज भी अगर कोई पढ़ ले तो वह देश से प्रेम करने लगेगा। भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों का यही एक मात्र सच है। बहुत कम लोगों को पता होगा कि भगत सिंह के अंदर एक अजीज शायर भी छिपा था। उनका दर्शन और साहित्य प्रेम जगजाहिर था। जेल में ही उन्होंने एक लायब्रेरी बना डाली थी। जिसमें उन्होंने अपनी मनपसंद कविताओं और शेरो शायरी का उल्लेख किया है। भगत सिंह की इन काव्य पंक्तियों को पढ़कर आदमी का इश्क इंकलाब हो जाता है।  
                                                                 
                            

'दिल दे तो इस मिजाज का परवरदिगार दे 
जो गमों की घड़ी भी खुशी से गुजार दे'

भगत सिंह के मन में स्वतंत्रता, कर्त्तव्य और अधिकारों पर अनुपम सोच थी। भगत सिंह की लड़ाई भारत में शासित अंग्रेजों से ही नहीं थी बल्कि उन्होंने समूची दुनिया में ब्रिटिश साम्राज्यवाद का पुरजोर विरोध किया था। भगत सिंह को उर्दू का खासा ज्ञान था। वह जेल में किताब पढ़ा करते थे। शेर और शायरी जैसे उनके जुबां में हर वक्त रहती थी। देशप्रेम की उनकी शायरी आज भी वतन-ए-मोहब्बत के पैगाम के साथ खनक रही है। 
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8 वर्ष पहले

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