दिल्ली सिर्फ देश बर की राजधानी ही नहीं है, साझा संस्कृति का केंद्र भी है। उर्दू शायरी के बड़े-बड़े दिग्गजों ने दिल्ली के रहन-सहन और तहज़ीबों को शायरी में बड़े सलीके से ढाला है। पेश है दिल्ली शहर पर शायरों के अल्फ़ाज़-
दिल्ली कहाँ गईं तिरे कूचों की रौनक़ें
गलियों से सर झुका के गुज़रने लगा हूँ मैं
- जाँ निसार अख़्तर
दिल की बस्ती पुरानी दिल्ली है
जो भी गुज़रा है उस ने लूटा है
- बशीर बद्र
दिल्ली में आज भीक भी मिलती नहीं उन्हें
था कल तलक दिमाग़ जिन्हें ताज-ओ-तख़्त का
- मीर तक़ी मीर
जनाब-ए-'कैफ़' ये दिल्ली है 'मीर' ओ 'ग़ालिब' की
यहाँ किसी की तरफ़-दारियाँ नहीं चलतीं
- कैफ़ भोपाली
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