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सुबह की दस्तक और ये 20 बड़े शेर...

सुबह की दस्तक और ये 20 बड़े शेर...
                
                                                         
                            

सुबह का वक़्त बेहद ख़ास होता है क्यूंकि हर आने वाले दिन के साथ कई उम्मीदें भी जाग जाती हैं। हर नये दिन के साथ नई ताजगी और नए सपने भी दस्तक देने लगते हैं और विश्वास भी की ज़िंदग़ी भी और ताज़ा हो जाएगी। इसी सुबह पर पेश हैं कुछ ख़ूबसूरत चुनिंदा शेर

ज़ुल्फ़ की शाम सुब्ह चेहरे की
यही मौसम जनाब दे दीजे
- साबिर दत्त


आँख खुलते ही याद आ जाता है तेरा चेहरा,
दिन की ये पहली ख़ुशी भी कमाल होती है
- अज्ञात

अब आ गई है सहर...

अब आ गई है सहर अपना घर सँभालने को
चलूँ कि जागा हुआ रात भर का मैं भी हूँ
- इरफ़ान सिद्दीक़ी
 

नई सुब्ह पर नज़र है मगर आह ये भी डर है
ये सहर भी रफ़्ता रफ़्ता कहीं शाम तक न पहुँचे
- शकील बदायुनी

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अब आ गई है सहर...

8 वर्ष पहले

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