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अवधी पद: 'बारहमासा' गीतों से चुनिंदा पंक्तियां 

अवधी पद: 'बारहमासा' गीतों से चुनिंदा पंक्तियां
                
                                                         
                            लोकगीत वह माध्यम है जिसमें समाज स्वयं को अभिव्यक्त करता आ रहा है। लोकसंगीत में उल्लास की अनंत संभावनाएं हैं, जिसके कारण यह हमेशा से लोगों के मन को लुभाता रहा है।लोकगीतों में जैसे विवाह के गीत हैं, खेती के गीत हैं, वैसे ही ऋतुओं के गीत भी हैं, बारहमासा भी है। पेश है बारहमासा से कुछ अंश अवधी में- 
                                                                 
                            

असाढ़ मास असाढ़ी जोग 
घर-घर मंदिर सजैं सब लोग 
चिरई चिरंगुल खोता लगाय 
हमरा बलमु परदेस में छाय 
      मैं न झूलिहौं 


भावार्थ:- अषाढ़ के महीने में आषाढ़ का योग है। सब लोग घर-घर में मंदिर सजा रहे हैं। चिड़िया-चिरंगुल भी घोंसले बना रहे हैं, मेरे प्रियतम परदेस में हैं, इसलिए मैं झूला नहीं झूलूंगी।  आगे पढ़ें

7 वर्ष पहले

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