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हर दौर में प्रासंगिक रहने वाली अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं के अंश....

हर दौर में प्रासंगिक रहने वाली अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं के अंश....
                
                                                         
                            अटल बिहारी के राजनैतिक व्यक्तित्व से सभी भलीभांति परिचित हैं और यह भी जानते हैं कि वह कविताएं भी लिखा करते थे, चुनावी वातावरण है और अटल जी
                                                                 
                            
की कुछ कविताएं बेसाख़्ता याद आती हैं। पेश हैं उनकी कविताओं से वे अंश जो हमेशा, हर दौर में प्रासंगिक रहेंगे- 

बेनकाब चेहरे हैं, दाग बड़े गहरे हैं 
टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूं
गीत नहीं गाता हूं 

~अटल बिहारी वाजपेयी

हर दौर में प्रासंगिक रहने वाली अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं के अंश...

खून क्यों सफेद हो गया?
भेद में अभेद खो गया
बंट गये शहीद, गीत कट गए,
कलेजे में कटार दड़ गई
दूध में दरार पड़ गई

~अटल बिहारी वाजपेयी
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7 वर्ष पहले

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