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अशोक चक्रधर की हास्य व्यंग्य कविता- राष्ट्रीय भ्रष्टाचार महोत्सव

Ashok Chakradhar
                
                                                         
                            राष्ट्रीय भ्रष्टाचार महोत्सव
                                                                 
                            

पिछले दिनों 
राष्ट्रीय भ्रष्टाचार महोत्सव 
मनाया गया, 
सभी सरकारी संस्थाओं को 
बुलाया गया। 
भेजी गईं सभी को 
निमंत्रण पत्रावली, 
साथ में प्रतियोगिता की नियमावली। 

लिखा था - 
प्रिय भ्रष्टोदय! 
आप तो जानते हैं 
भ्रष्टाचार हमारे देश की 
पावन, पवित्र, सांस्कृतिक विरासत है, 
हमारी जीवन-पद्धति है 
हमारी मजबूरी है 
हमारी आदत है। 
आप अपने 
विभागीय भ्रष्टाचार का 
सर्वोत्कृष्ट नमूना दिखाइए, 
और उपाधियाँ तथा 
पदक-पुरस्कार पाइए। 
व्यक्तिगत उपाधियाँ हैं -  
भ्रष्ट शिरोमणि, भ्रष्ट भूषण 
भ्रष्ट विभूषण और भ्रष्ट रत्न 
और यदि सफल हुए 
आपके विभागीय प्रयत्न, 
तो कोई भी पदक, जैसे : 
स्वर्ण गिद्ध 
रजत बगुला 
या काँस्य कउआ दिया जाएगा, 
सांत्वना-पत्र और 
विस्की का 
एक-एक पउआ दिया जाएगा। 
प्रविष्टियाँ भरिए 
और न्यूनतम योग्यताएँ 
पूरी करते हों तो 
प्रदर्शन अथवा प्रतियोगिता-खंड में 
स्थान चुनिए। 
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3 years ago

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