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मंगल नसीम: नहीं हम में कोई अन-बन नहीं है

mangal naseem famous ghazal nahin hum mein koi anban nahin hai
                
                                                         
                            


नहीं हम में कोई अन-बन नहीं है
बस इतना है कि अब वो मन नहीं है

मैं अपने आप को सुलझा रहा हूँ
तुम्हें ले कर कोई उलझन नहीं है

मुझे तुम ग़ैर भी क्यों कह रहे हो
भला क्या ये भी अपना-पन नहीं है

किसी के मन को भी दिखला सके जो
कहीं ऐसा कोई दर्पन नहीं है

मैं अपने दोस्तों के सदक़े लेकिन
मिरा क़ातिल कोई दुश्मन नहीं है

एक घंटा पहले

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