वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर
आदत इस की भी आदमी सी है
- गुलज़ार
उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़
हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा
- अमीर क़ज़लबाश
या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से
कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
- जिगर मुरादाबादी
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