1
कभी पसारो
बाँहे नभ सी तुम
मुझे भर लो
आलिंगन में प्रिय
अवसाद हर लो
2
उगता रवि
धरा का माथा चूमे
खग - संगीत
मिले ज्यों मनमीत
दिग-दिगन्त झूमे
3
ताप-संताप
मिटे हिय के सब
प्रिय -दर्शन
प्रफुल्ल तन-मन
ज्यों खिले उपवन
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