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World Sparrow Day 2024: शशि पाधा की कविता- अरी गौरैया, चुग ले दाना

कविता
                
                                                         
                            अरी गौरैया, चुग ले दाना
                                                                 
                            
 जब तक रहते खेत हरे ।
 
देर नहीं जब इन खेतों में
कंकर-पत्थर बिछ जाएँगे
गगन चूमते भवन मंजिलें
धूमिल बादल मँडराएँगे
अरी गौरैया, नीड़ बना ले
जब तक दिखते पेड़ हरे।
 
जंगल-पर्वत, बाग़- बगीचे
पोखर- झरने कल की बात
न आँगन, न लटके छींके
न तसला, न नेह परात
अरी गौरैया प्यास बुझा ले
जब तक नदिया नीर बहे आगे पढ़ें

2 वर्ष पहले

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