स्वतंत्रता दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री लाल किले से देश को संबोधित करते हैं, इस बार भी वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपना भाषण दिया। उनके भाषण में कई ख़ास बातों के साथ एक बात यह भी रही कि उन्होंने अपने भाषण की समाप्ति एक कविता के साथ की, पढ़ें वह कविता
अपने मन में एक लक्ष्य लिए
मंज़िल अपनी प्रत्यक्ष लिए
हम तोड़ रहे हैं जंजीरें
हम बदल रहे हैं तस्वीरें
ये नवयुग है, नव भारत है
खुद लिखेंगे अपनी तकदीरें
हम निकल पड़े हैं प्रण करके
अपना तन-मन अर्पण करके
जिद है एक सूर्य उगाना है
अम्बर से ऊँचा जाना है
एक भारत नया बनाना है
एक भारत नया बनाना है
इस कविता को प्रधानमंत्री के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से भी ट्वीट किया गया है।
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