आहटें सुन रहा हूँ यादों की
आज भी अपने इंतज़ार में ग़ुम
- रसा चुग़ताई
आने में सदा देर लगाते ही रहे तुम
जाते रहे हम जान से, आते ही रहे तुम
- इमाम बख़्श नासिख़
अब इन हुदूद में लाया है इंतज़ार मुझे
वो आ भी जाएँ तो आए न ऐतबार मुझे
- ख़ुमार बाराबंकवी
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