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जा रहा हूं जीवन की खोज में- दूधनाथ सिंह

दूधनाथ सिंह
                
                                                                                 
                            जा रहा हूं जीवन की खोज में
                                                                                                

सम्भवत: मृत्यु मिले
सम्भवत: मिले एक सभ्य
सुसंस्कृत जीवन-व्यवहार
सांझ मिले बांझ
आंच न मिले
जीवन की राख मिले
दसों-दिशाओं में ।
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1 year ago

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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