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आजाद बला की रचनाकार अमृता प्रीतम की 2 चुनिंदा कविताएं

अमृता प्रीतम
                
                                                         
                            मैंने पल भर के लिए --आसमान को मिलना था 
                                                                 
                            
पर घबराई हुई खड़ी थी ....
कि बादलों की भीड़ से कैसे गुजरूंगी ..

कई बादल स्याह काले थे 
खुदा जाने -कब के और किन संस्कारों के 
कई बादल गरजते दिखते
जैसे वे नसीब होते हैं राहगीरों के 

कई बादल शुकते ,चक्कर खाते 
खंडहरों के खोल से उठते ,खतरे जैसे 
कई बादल उठते और गिरते थे 
कुछ पूर्वजों कि फटी पत्रियों जैसे  आगे पढ़ें

6 वर्ष पहले

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