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मोहब्बत: दिल की कैफ़ियत बयां कर रहे हैं ये 21 शेर

मोहब्बत: दिल की कैफ़ियत बयां कर रहे हैं ये 21 शेर
                
                                                         
                            आख़री हिचकी तिरे ज़ानूं पे आए
                                                                 
                            
मौत भी मैं शाइराना चाहता हूं
क़तील शिफ़ाई

अभी राह में कई मोड़ हैं कोई आएगा कोई जाएगा
तुम्हें जिस ने दिल से भुला दिया उसे भूलने की दुआ करो
बशीर बद्र

अभी ज़िंदा हूं लेकिन सोचता रहता हूं ख़ल्वत में
कि अब तक किस तमन्ना के सहारे जी लिया मैं ने
साहिर लुधियानवी आगे पढ़ें

अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो...

8 वर्ष पहले

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