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Hasya: ओम प्रकाश आदित्य की कविता- कृपा कर जाने की तिथि ही बतलाइए

हास्य
                
                                                         
                            पूज्यपाद अतिथि जी खाना आप खा चुके हैं 
                                                                 
                            
अब मेरे बच्चों पे रहम कुछ खाइए 

आपके आने की तिथि तो न हमें याद रही 
कृपा कर जाने की तिथि ही बतलाइए 

अतिथि सेवा का पुण्य बहुत कमा चुका हूँ 
मारा जाऊँगा न और ज़्यादा कमवाइए 

होली मेरे घर की दशहरा मेरे घर किया 
दीवाली तो कहीं और जाकर मनाइए। 
2 वर्ष पहले

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