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एनी अर्नो को नोबेल: स्त्री शक्ति को सलाम

Nobel to Annie Arno: Salute to women's power
                
                                                         
                            
इस साल की साहित्य की नोबेल विजेता एनी केलिए भाषा एक चाकू की तरह है जिससे वे सत्य की चीर-फ़ाड़ करती हैं। 2022 का नोबेल पुरस्कार फ़्रेंच साहित्यकार एनी अर्नो को दिया गया है। नोबेल समिति के अनुसार यह पुरस्कार ‘साहस तथा लाक्षणिक प्रखरता के साथ व्यक्तिगत स्मृति के अंतस, व्यवस्थाओं एवं सामूहिक दु:खों को प्रकट करने वाली उनकी लेखनी को दिया गया है।’ 82 साल की एनी का जन्म 1 सितंबर 1940 को हुआ था। उनका पालन-पोषण नोर्मंडी के एक छोटे शहर में हुआ, जहाँ उनके माता-पिता एक कैफ़े तथा परचून की दुकान चलाते थे। समाजशास्त्र पर आधारित आत्मकथात्मक लेखन करने वाली एनी अर्नो के अनुसार लिखना एक राजनैतिक कर्म है। यह कार्य सामाजिक असमानता के प्रति हमारी आँखें खोल कर हमें सजग करता है। यह राजनैतिक आयाम उनकी भाषा में बराबर नजर आता है।

लंबे समय से मेहनत तथा कठिनाई के साथ निरंतर लिखने वाली फ़्रेंच भाषा की इस लेखिका का काफ़ी कार्य कई अन्य भाषाओं के साथ-साथ इंग्लिश में भी उपलब्ध है। इंग्लिश में ‘ए वूमन’स स्टोरी’, ‘क्लीन आउट’, ‘पोजीशन्स’, ‘ए मैन’स प्लेस’, ‘सिंपल पैशन’, ‘पैशन परफ़ैक्ट’, ‘ए फ़्रोज़न वूमन’, ‘एक्सटेरिअर्स’, ‘आई रेमैन इन डार्कनेस’, ‘शेम’, ‘द पोजेशन’, ‘हैपनिंग’, ‘थिंग्स सीन’, ‘ए मैन’स प्लेस’, ‘ ‘द इयर्स’, ‘ए गर्ल’स स्टोरी’, ‘एक्सटेरिअर्स’, ‘गेटिंग लॉस्ट’, ‘डू व्हाट दे से ओर एल्स’ आदि उनकी रचनाएँ प्रकाशित हैं।
 
एनी अर्नो अपने काम में फ़िक्शन, समाजशास्त्र तथा इतिहास में आवाजाही करती रहती हैं। अपने लेखन में वे जिंदगी को विभिन्न कोण से देखती-दिखाती हैं, जहाँ लिंग, भाषा तथा वर्ग की असमानता मजबूती से नजर आती है। वे अपने ग्रामीण परिवेश को कभी नहीं भूलती हैं। एनी स्वयं को फ़िक्शन राइटर से अधिक खुद को अपने ढ़ंग की मानवजाति विज्ञानी मानती हैं। उनकी शैली विशिष्ट तथा क्लासिकल है। वे डायरी के फ़ॉर्म में अतीत का पुनर्निर्माण करती हैं। इस शैली में उनका ‘थिंग्स सीन’ तथा ‘एक्सटिरिअर्स’ प्राप्त होता है।

मार्शल प्रूस्त तथा समाजशास्त्री पियर बोर्दिओ से प्रभावित एनी अर्नो का प्रथम कार्य 1974 में प्रकाशित हुआ जिसका इंग्लिश अनुवाद ‘क्लीन्ड आउट’ नाम से 1990 में आया। इसमें वे नोर्मंडी की अपनी पृष्ठभूमि की खोज-खबर लेती हैं। परंतु चौथे कार्य ‘ए मैन’स प्लेस’ के साथ वे स्थापित हो गईं। मात्र 100 पन्नों में एनी अपने पिता का शब्द चित्र उनके पूरे सामाजिक परिवेश के साथ उकेरती हैं और बताती हैं कि उनके पिता का निर्माण कैसे हुआ। इसके साथ उनके आत्मकथात्मक लेखन की शुरुआत होती है जो कल्पना के आगे जाता है। कुछ साल के पश्चात वे अपनी माँ का चित्र ‘ए वूमन’स स्टोरी’ में खींचती हैं। वे माँ को एक मजबूत स्त्री के रूप में स्थापित करती हैं, माँ जो अपनी गरिमा हर परिस्थिति में पिता से अधिक कायम रखती है। माँ के साथ उनके संबंध में शर्म और कष्टदायक चुप्पी वैसी तीव्रता से नहीं है, जैसी पिता के संबंध में है।

अपने अतीत के पुनर्निर्माण की दारुण यातना उनके 1998 में आई ‘शेम’ रचना में दीखती है। सलमान रुश्दी की एक रचना का नाम भी यही है। यह कई रूपों में उनके पिता के चित्रण की ही निरंतरता है। अतीत में उनके पिता एक खास मौके पर उनकी माँ से अचानक बहुत क्रोधित हो गए। इस रचना का पहला वाक्य पाठक पर एक कोड़े की चोट की भाँति असर करता है। पहला वाक्य है, ‘जून में एक इतवार को दोपहर के पूर्व मेरे पिता ने मेरी माँ की हत्या का प्रयास किया।’ वे सदैव सहनशीलता की सीमा के बाहर जाती हैं। उनके अनुसार वे सदा से ऐसा कुछ लिखना चाहती हैं, ऐसी किताब लिखना चाहती हैं, जिसके विषय में बाद में बात करना उनके लिए कठिन ही नहीं असंभव हो। ऐसी किताब जिसे पढ़ कर लोग उन्हें घूरें, दूसरों का जो घूरना उनके लिए असहनीय हो।

जो शर्मनाक स्थितियाँ जिसमें हम जीते हैं, वो जीवन के अनुभव को असहनीय बनाती हैं। जब वे लिखती हैं तब गरिमा अथवा गरिमा की कमी का प्रश्न विवाद का विषय होता है। साहित्य उन्हें लिखने का स्वर्ग प्रदान करता है, वे वह सब लिखती जाती हैं जो प्रत्यक्ष रूप में किसी से साझा करना असंभव है। एनी अपनी रचना ‘हैपनिंग’ में एक 23 साल की कथावाचिका के द्वारा गैर-कानूनी गर्भपात की बात करती हैं। उनका यह मास्टरपीस उत्तम पुरुष में कहा गया है। यहाँ ‘मैं’ वस्तुनिष्ठ ढ़ंग से प्रस्तुत है। एक दमनकारी समाज में नैतिक प्रतिबंध होते हैं, वे लोगों की सरपरस्ती का जम कर सामना करती हैं। यह रचना निर्दयतापूर्वक सच्चाई के साथ लिखी गई है, जहाँ वे अत्यंत स्पष्टता स्वर में प्रमुख चिंतन कोष्ठक में जोड़ती जाती हैं। एक ही प्रवाह में वे स्वयं तथा पाठक को संबोधित करती हैं। घटना के 25 साल बाद लिखी इस रचना में पाठक भी सहभागी बनता है। एक अन्य रचना ‘द पोजेशन’ में वे रोमांटिक प्रेम के सामाजिक मिथक की शल्य क्रिया करती हैं।
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3 वर्ष पहले

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