साहित्य में 2025 के नोबेल पुरस्कार की घोषणा हो चुकी है। हंगरी के लेखक लास्जलो क्रास्जनाहोरकाई इस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किए जाएंगे। स्वीडन की स्वीडिश एकेडमी ने गुरुवार (09 अक्तूबर) को इसका एलान किया है। साहित्य के नोबेल की घोषणा करते हुए स्वीडिश एकेडमी ने कहा कि उनका लेखन आतंक के बीच भी कला की ताकत दर्शाता है।
साहित्य के क्षेत्र में दिए जाने वाला यह पुरस्कार उन लेखकों को मिलता है, जिनकी शानदार लेखनी वाली किताबें या कविताएं साहित्य में खास योगदान देती हैं। ऐसे ही हंगरी लेखक लास्जलो को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना (10.3 करोड़ रुपए), सोने का मेडल और सर्टिफिकेट से नवाजा जाएगा।
उनको इस पुरस्कार से 10 दिसंबर को स्टॉकहोम में सम्मानित किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले लास्जलो को साल 2015 में मैन बुकर इंटरनेशनल प्राइज और 2019 में नेशनल बुक अवॉर्ड फॉर ट्रांसलेटेड लिटरेचर भी मिल चुका है।
लास्लो क्रस्नाहोरकाई एक हंगेरियन उपन्यासकार हैं, जो अपनी जटिल कथाओं और दस-पृष्ठों तक लंबे वाक्यों के लिए जाने जाते हैं। वह 'सैतानटैंगो' और 'द मेलानचोली ऑफ़ रेसिस्टेंस' जैसी कृतियों के लेखक हैं। उनकी रचनाएँ रहस्यमय घटनाओं और विचित्र अफवाहों से भरी होती हैं, जैसा कि 'द मेलानचोली ऑफ़ रेसिस्टेंस' उपन्यास में देखा जा सकता है। 'संतातागो', 'द मलान्क्ली ऑफ रेजिस्टेंस', 'वार एण्ड वार', और 'एनिमल इन साइड' आदि इनके चर्चित उपन्यास हैं।
लास्लो क्रस्नाहोरकाई का जन्म 5 जनवरी 1954 को हंगरी के ग्युला शहर में एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ था। उनके पिता, जिर्ज़ी क्रास्नाहोरकाई एक वकील थे और उनकी माँ, जूलिया पालिनकास, एक सामाजिक सुरक्षा प्रशासक थीं। उनके पिता ने अपनी यहूदी विरासत को छुपाकर रखा था, और इसे उन्होंने क्रास्नाहोरकाई को तब बताया जब वह ग्यारह वर्ष के थे। उन्होंने 1972 में एर्केल फेरेंक हाई स्कूल से स्नातक किया, जहाँ उन्होंने लैटिन विषय में विशेषज्ञता हासिल की। 1973 में क्रास्नाहोरकाई ने योजेफ़ अटिला विश्वविद्यालय में कानून की पढ़ाई शुरू की।
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद से क्रास्नाहोरकाई एक स्वतंत्र लेखक के रूप में कार्य कर रहे हैं। उनका पहला उपन्यास "सैतानटैंगो" (1985) अपने प्रकाशन बाद जल्द ही सफल रहा, जिसने उन्हें हंगेरियन साहित्य में एक प्रमुख हस्ती के रूप में स्थापित कर दिया।
10 महीने पहले
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