प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने करीब 16 मिनट 50 सेकेंड के भाषण के दौरान मशहूर और प्राचीन तमिल कवि कनियन पुंगुदरनार की पंक्तियों को कोट किया। कनियन संगम काल में मशहूर और प्रभावशाली दर्शनशास्त्री के रूप में मशहूर हुए। पीएम मोदी ने उनकी पंक्ति- यादं उरे यावुरूं केड़ीर को कोट किया, जिसका मतलब होता है- हम सभी स्थानों के लिए अपनेपन का भाव रखते हैं। कनियन एक तमिल शब्द है जिसका आशय है कि वे एक खगोलशास्त्रीय थे। उन्होंने 2 कविताओं की रचना की- 'पुन्नानु और नत्रीनई'।
कविता में कनियन बताते हैं-
हमारे लिए सभी शहर हमारे अपने हैं, सभी हमारे परिजन हैं,
जीवन में बेहतरी दूसरों के उपहारों से संभव नहीं, न ही दूसरों ही बुराई से,
दर्द और दर्द की दवा, दोनों अंदर मौजूद है,
मौत कोई नई बात नहीं है, न ही हमारे शरीर में रोमांच है
जब आनंदित जीवन एक सुस्वादु मसौदे की तरह लगता है...
कनियन ने मनुष्यों के श्रेणीगत विभाजन को नकारा और मानवता की सार्वभौमिक स्वीकरोक्ति पर जोर दिया। कुल मिलाकर अपनी कविताओं में भी उन्होंने जीवन में प्राकृतिक नियमों के अनुपालन में जीवन की सार्थकता समझी।
कनियन पुंगुदरनार की कविता- 'यथुम उरे...' को शिकागो में होने वाले 10 वें विश्व तमिल सम्मेलन के थीम सांग के रूप में घोषित किया गया है। दो हजार साल पुरानी इस कविता को अमेरिकन संगीतकार राजन सोमसुंदरम ने पहली बार संगीतबद्ध किया है। कई अंतर्राष्ट्रीय गायकों समेत इसे एकेडमी के लिए नामित बांबे जयश्री और कार्तिक ने गाया है।
पुनर्जागरणवादी स्वाभिमान आंदोलन में कनियन पुंगुदरनार बेहद प्रभावशाली व्यक्तित्व थे। उनकी कविता की पहली पंक्ति को तमिल लोगों का प्रतिनिधित्व करने के लिए विश्व थमिजह संघ के सिद्धांत के रूप में अपनाया गया है।
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