फ़्रेंच लेखिका ऐनी अर्नो को इस साल साहित्य के क्षेत्र में नोबेल सम्मान देने की घोषणा हुई है। 82 साल की ऐनी लेखिका होने के साथ-साथ साहित्य की प्रोफ़ेसर भी हैं। उनका अधिकतर साहित्यिक काम समाजशास्त्र पर है। यह नोबल सम्मान उन्हें साहित्य में साहस के लिए मिला है।
ऐनी अर्नो का जन्म 1 सितम्बर 1940 को फ्रांस के सेन मरीटिम में हुआ था। नौकरीपेशा परिवार से आने वाली ऐनी के माता-पिता ने बाद में एक स्टोर खोल लिया था। 1971 में ऐनी ने आधुनिक साहित्य की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने फ्रांस के नाटककार और उपन्यासकार मारीवॉ पर एक थीसिस योजना पर भी काम किया। ऐनी अर्नो ने 34 की उम्र में साल 1974 से अपनी साहित्यिक यात्रा आरंभ कर दी। उनका पहला उपन्यास आत्मकथात्मक था जिसका अंग्रेज़ी शीर्षक 'क्लीन्ड आउट' है। 1984 में उन्हें कृति 'ला प्लेस' के लिए फ्रांस का प्रतिष्ठित सम्मान रेनॉडॉ मिला था। यह किताब पिता के साथ उनके संंबंधों, फ्रांस के छोटे से शहर में पले-बढ़े होने, वयस्क होने और फिर माता-पिता से दूर होने के अनुभवों पर आधारित है। करियर के शुरुआती दौर में ही उन्होंने आत्मकथात्मक गद्य की ओर ध्यान केन्द्रित कर लिया था। उनका लेखन ऐतिहासिक और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित है।
उनकी किताब 'द ईयर्स' को 2019 में बुकर के लिए नामांकित किया गया था।
3 वर्ष पहले
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